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मेरा मान्ना है हिंदुस्तान का मुसलमान दुनिया का सबसे दोगला मुसलमान है। 
ये हर वो काम करता है जिससे बहुसंख्यक हिंदुओं को नीचा दिखाया जा सके।

🔴 मोहम्मद साहब का जन्मदिन दुनिया में कहीं नहीं मनाया जाता लेकिन भारत में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस निकाल कर हाईवे जाम किया जाता है।

🔴 तमाम इस्लामी मुल्क अपने देश का पारंपरिक परिधान पहनते हैं लेकिन भारत का मुसलमान दाढ़ी बढ़ा के ऊँचा पायजामा पहन कर खुद को अलग दिखाने की कोशिश करता है।

🔴 दुनिया में कोई भी मुल्क हज पर सब्सिडी नहीं देता, क़ुरान में भी दूसरों के पैसे से हज करना मना है लेकिन हिन्दुस्तान के मुसलमान हज सब्सिडी स्वीकार करते आये हैं।

🔴 अरब में मस्जिदें तोड़ दी जाती हैं ❕❕कोई कुछ नहीं बोलता लेकिन भारत में बाबरी ढाँचे पर 2010 में आये कोर्ट के फैसले में 

👉 एक जज को यह लिखना पड़ा कि [ राम जन्म भूमि ] वह स्थान है जहाँ फ़रिश्ते भी आने से डरते हैं।

🔴 एक हिन्दू बहुल देश में रहकर इन्हें स्वेच्छा से गोमांस का परित्याग कर देना चाहिये था 😡 लेकिन आप हैदराबाद चले जाइये ओल्ड सिटी में चार मीनार तक जाने में घण्टा भर बीफ ही बदबू देता  है।

🔴 यही हाल तीन तलाक का भी है। इन्हें शर्म नहीं आती कि एक औरत को प्रचण्ड गरमी में काले लिबास में ढंक कर रखते हैं और जब मन किया तब तीन बार तलाक कह कर उसकी ज़िन्दगी बर्बाद कर देते हैं।

🔴 आज़ादी से कुछ साल पहले तक मुसलमानों के पास जनसंख्या के हिसाब से हिन्दुओं से ज्यादा जमीन थी। दिल्ली सल्तनत से लेकर बहादुर शाह ज़फ़र तक इन्होंने राज किया। और आज ये कहते हैं कि हाय हाय! हम तो बड़े पिछड़े हैं, गरीब हैं।

ये बड़ी अनोखी बात है कि भारत के मुसलमानों को अपनी उन्नति से ज्यादा अपमान की फ़िक्र होती है। इसका कारण भी है। हिंदुओं के पास पचासों किताबें हैं, एक नहीं दूसरी सही, दूसरी नहीं तीसरी से काम चला लेंगे। लेकिन एक बार क़ुरान शरीफ की शराफत का पर्दाफाश हुआ नहीं कि मुसलमानों की शांति की इमारत भरभरा के गिर जायेगी।

भारत का मुसलमान ऐसा विचित्र प्राणी है कि टीवी चैनल पर बैठ कर सरेआम झूठ बोलता है कि भारत में इस्लाम हिंसा से और जबरन मतपरिवर्तन से नहीं फैला था। ये बोलने वाला भी खुद मतांतरित मुसलमान है जिसके पुरखे ज्यादा नहीं पाँच छः सौ साल पहले ही मुसलमान बने होंगे। दोगलई की ऐसी मिसाल और कहीं नहीं मिलेगी।

अपने मजहब को समाज पर थोपने के लिए जो हथकंडा अपनाया जाता है उसी एक कड़ी है ➖

अजान सुनाता लाउड स्पीकर। यहाँ कट्टरपंथी और चरमपंथी मानसिकता में अंतर समझना जरूरी है। कट्टरपंथी अपने पंथ मजहब के नियमों से समझौता नहीं करता। अपनी उपासना पद्धति से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करता। यह एक हद तक स्वीकार्य है।
उदाहरण के लिए पारसी केवल पारसियों में ही शादी करते हैं, फायर टेम्पल में भी दूसरे मतावलम्बियों का जाना मना है। लेकिन
 चरमपंथी विचारधारा वाला समुदाय अपनी बात मनवाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थानों के नियमों से भिड़ जाता है। सरकार अपनी वाली हो तो प्रत्यक्ष रूप से, न हो तो ऐसे काम करता है जिससे 'नागरिक बोध' का हनन होता हो।

 👉 लाउड स्पीकर लगा के अजान सुनाने के पीछे यही मुख्य कारण है।

⚫अब यदि आप इस पर उंगली उठाएंगे तो कहा जायेगा कि साहब हिन्दू भी तो माता के जगराते में गाना बजाते हैं या शादी में बैंड बजाते हैं।
⚫आप ईद मिलादुन्नबी की जुलूस पर कुछ कहेंगे तो सवाल उठेगा कि कांवरियों के लिए सावन में हाईवे बन्द कर दिया जाता है।
⚫गोमांस के नाम पर वेदों के उलटे पुलटे अनुवाद और कचरा खाती गाय की फोटो तुरन्त दिखाई जाती है। 

यानी मुसलमानों की हर गुंडई पर हिन्दू जवाब देता फिरे।

दरअसल इस्लाम का इतिहास देखा जाये तो आप पाएंगे कि ये कोई पंथ मत या मजहब नहीं है बल्कि एक वैश्विक राजनीतिक घटना है जो समय समय पर घटित होती रहती है.

 यह चरमपंथी एकाधिकारवादी निरंकुश व्यवस्था है जो यह कहती है कि मेरे सिवा और कोई सही नहीं हो सकता एक समय में साम्राज्यवादी हुआ करते थे जैसे सिंकदर, ब्रिटेन इत्यादि। 

आज इस्लाम है।  👈

अब भारत के मुसलमानों की स्थिति इस phenomenon में यूनीक है ➖ 

क्योंकि ये पैदाइशी दोगले हैं।

इन्हें ये समझना चाहिये कि किसी भी सामाजिक व्यवस्था में जब कोई बड़ा परिवर्तन आता है तो विरोधियों से कड़वे शब्द सुनने को मिलते हैं।

हिंदुओं ने भी जातपात को लेकर बहुत कुछ सुना है। सती प्रथा, दहेज आदि पर आज भी विरोध होता है। तो हिंदुस्तान के मुसलमान को अपने मजहब की बुराइयों को जस्टिफाई कर के कुछ हासिल नहीं होने वाला है। बातें तो सुननी पड़ेंगी।

 

जब वैश्विक बदलाव आयेगा तो आपको भी बदलना पड़ेगा। 
तुम खुद नहीं बदलोगे तो हम तुमको बदल देंगे। 

✊✊ हम हिन्दू तो प्रकृति के उपासक हैं, 🍃 

परिवर्तन को सबसे बड़ा नियम मानते हैं। ☺☺

🌸🌹 जय महाकाल 🌸🌹